हिन्दी पाठ योजना आवश्यकता एवं हिन्दी शिक्षण के उद्देश्य

हिन्दी पाठ योजना आवश्यकता एवं हिन्दी शिक्षण के उद्देश्य

पाठ योजना बनाने की आवश्यकता 

हिन्दी शिक्षण को सफल बनाने के लिए पाठ योजना बनाने की निम्नलिखित कारणों से आवश्यकता होती है 

1. पाठ योजना शिक्षक के लिए पथ-प्रदर्शक का कार्य करती है।

2. पाठ योजना सहायक सामग्री के विषय में सोचने तथा प्रयोग करने को प्रोत्साहित करती है।

3. पाठ योजना शिक्षण प्रक्रिया के नियोजन में सहायता करती है।

4. पाठ योजना के द्वारा प्रस्तुतीकरण के क्रम तथा पाठ्यवस्तु के रूप को निश्चित कर लिया जाता है।

5. पाठ योजना अध्यापक को उचित शिक्षण विधि का चयन करने में सुविधा प्रदान करती है।

6. पाठ योजना से शिक्षक को सफल शिक्षण के लिए पूर्व विचार एवं चिन्तन का अवसर मिलता है।

7. शिक्षक पाठ योजना के द्वारा, पाठ की सामग्री को संगठित एवं सुव्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने में समर्थ होता है।

8. पाठ योजना तैयार करने से यह ज्ञात हो जाता है कि शिक्षक का शिक्षण सफल हुआ या नहीं।

9. पाठ योजना में शिक्षक द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों का पहले से ही निर्धारण कर लिया जाता है।

10. पाठ योजना के द्वारा शिक्षक अपने शिक्षण का मूल्यांकन सरलता से कर लेता है।

11. पाठ योजना के द्वारा शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन जाती है।

12. पाठ योजना के द्वारा छात्रों की क्रियाओं के नियंत्रण तथा पुनर्बलन की प्रविधियों के प्रयोग की परिस्थिति


हिन्दी शिक्षण के उद्देश्य

उद्देश्य तथा शिक्षण के पक्ष

छात्रों में अपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन

 

1. ज्ञान कराना-

(1) भाषा तत्वों का ज्ञान (पाठ्यक्रमानुसार)

(2) विषय तत्वों का ज्ञान (तथ्य, घटना, चरित्र, विचार, जीवन मूल्य आदि जो पाठों में से चुने जायें)

(3) रचना के रूपों का ज्ञान (पत्र, निबन्ध, कहानी, संवाद, आत्म कथा आदि

 

1. पहचान करना

2. पुनः स्मरण करना

2. अर्थग्रहण कराना-

(शब्द, पद, मुहावरे, कहावत, वाक्य, तथ्य, घटनायें, विचार, भाव, चरित्र, सामाजिक-सांस्कृतिक आशय, जीवन मूल्य आदि जो पाठ्यक्रम तथा पाठों में से चुने जाये

 

1. तुलना करना

2. अन्तर करना

3. उदाहरण देना

4. सम्बन्ध खोजना

5. वर्गीकरण करना

6. विश्लेषण करना

7. संश्लेषण करना

8. सारांश लिखना

9. विस्तार करना

10. केन्द्रीय भाव बताना

11. क्रमबद्ध करना

12. सम्बद्ध करना

13. पूर्वानुभाव करना

14. फलितार्थ निकालना

15. पुनः व्यवस्थित करना

16. सूत्रबद्ध करना

17. रूपान्तरण करना

18. नियमीकरण करना

19. शीर्षक बनाना

20. निष्कर्ष निकालना

 

3. अभिवृत्ति के विकास के अवसर बनाना 

- (शब्दों, पदों, प्रयोगों के सांस्कृतिक आशय, शब्द संरचना, वाक्य संरचनापाठों में आये जीवन-मूल्य, घटनायें, विश्वास, सामाजिक चेतना आदि)

 

1. आस्था व्यक्त करना

2. अनास्था व्यक्त करना 

3. सहमति देना

4. असहमति बताना

5. अनुकूलता बताना

6. प्रतिकूल मत देना

7. सामान्यीकरण करना

8. निर्णय देना

9. प्रस्ताव देना

10. विकल्प देना

11. सिद्ध करना

12. मानदण्ड बताना 

13. परख करना

4. अभिरुचि विकास के अवसर बनाना 

(शब्द, पद, मुहावरे, कहावते, संवाद आदि

 

1. उद्यमता व्यक्त करना

2. तत्परता दिखाना

3. अवधान करना 

4. निष्ठा व्यक्त करना

5. अभिव्यक्ति विकास के अवसर बनाना 

(विभिन्न प्रकार के प्रश्न, भाषा कार्य, मौखिक कार्य, लिखित कार्य आदि

 

1. शुद्धता व्यक्त करना

2. स्पष्टता का निर्वाह

3. लाधव लाना

4. अभिष्टता लाना

5. मौलिकता लाना

6. प्रवाह लाना

6. वाचन की दक्षता के अवसर बनाना 

(संवाद, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, भाव प्रधान अनुच्छेद, कवितायें, क्लिष्ट पदों के वाक्य आदि

 

1. विराम चिह्नों पर रूकना

2. निर्बाध वाचन करना

3. शुद्ध उच्चारण करना

4. आरोह-अवरोह लाना

5. भावानुकूल वाचन करना


Kkr Kishan Regar

Dear Friends, I am Kkr Kishan Regar, a passionate learner in the fields of education and technology. I constantly explore books and various online resources to expand my knowledge. Through this blog, I aim to share insightful posts on education, technological advancements, study materials, notes, and the latest updates. I hope my posts prove to be informative and beneficial for you. Best regards, **Kkr Kishan Regar** **Education:** B.A., B.Ed., M.Ed., M.S.W., M.A. (Hindi), P.G.D.C.A.

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